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भटकटैया: जड़ों की बात
भटकटैया: जड़ों की बात : जड़ों में सिर्फ़ जड़ें ही नहीं हैं वहां पहाड़ हैं दुखों के (एक बार एक कवि ने दुःख को चम्मच से नहीं पीने आकंठ डूबने...
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जड़ों में सिर्फ़ जड़ें ही नहीं हैं वहां पहाड़ हैं दुखों के (एक बार एक कवि ने दुःख को चम्मच से नहीं पीने आकंठ डूबने के बारे में कहा ) यहाँ...
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भटकटैया की बात आज पहले पोस्ट में इस शुरुआत के बारे में ही बात करते हैं . तो, यह भटकटैया ज़िन्दगी को उसके तमाम रूप,रस ,गंध, ज़िद ,ज़िन्दगीपन...
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भटकटैया: जड़ों की बात : जड़ों में सिर्फ़ जड़ें ही नहीं हैं वहां पहाड़ हैं दुखों के (एक बार एक कवि ने दुःख को चम्मच से नहीं पीने आकंठ डूबने...
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